माना इक तरफ़ा मोहब्बत को मोहब्बत नहीं कहते,
मगर मोहब्बत की वो कौन सी तड़प है,
जिसे हम नहीं सहते.....
उनकी सूरत देखकर हमें भी चैन मिलता है,
उनके चले जाने पर हमारा भी दम निकलता है..
हमारे भी खाबों में वो रोज आते हैं,
उनके ख्याल हमें भी तड़पाते है...
उनका नाम हम भी मिटाते हैं लिखकर,
हम भी लगा लेते हैं उनकी तस्वीर सीने से तड़प कर...
हम कब उन्हें याद नहीं करते?
वो कब हमारे दिल में नहीं रहते?
माना इक तरफ़ा मोहब्बत को मोहब्बत नहीं कहते,
मगर मोहब्बत की वो कौन सी तड़प है,
जिसे हम नहीं सहते.....

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