Tuesday, February 22, 2011

मुझे गम होता क्यूँ है???

ना जाने तेरे और किसी के हो जाने का,
मुझे गम होता क्यूँ है;
मैं जानता हूँ तू मेरी हो जाए मुमकिन नहीं,
फिर भी तेरी याद आने पर,
दिल रोता क्यूँ है;

तेरी नज़रों की भाषा हम समझ ना सके,
शायद उसी की सज़ा काट रहे हैं हम;
तेरे दिल का इरादा हम समझ ना सके,
शायद उसी की सज़ा काट रहे हैं हम;

पर मेरे बस में ही क्या था,
तेरा इरादा जाने बगैर भी तो,
चैन नहीं आता मुझको;
मैंने वही किया जो मेरे दिल ने,
करने के लिए मजबूर किया मुझको;

अंजाम भी वही हुआ,
जिसकी कुछ कुछ उम्मीद थी मुझे;
मेरा दिल टूटकर बिखर गया,
और हम पा ना सके तुझे;

हुआ बिल्कुल वैसा ही जैसी उम्मीद थी--
फिर भी दिल, तेरा मेरे हो जाने के,
झूठे सपने संजोता क्यूँ है;
ना जाने तेरे और किसी के हो जाने का,
मुझे गम होता क्यूँ है???

December, 1996

Monday, February 14, 2011

तो अच्छी लगती हो....

तुम मुस्कुराती  हो  तो  अच्छी  लगती हो

तुम   बोलती   हो   तो   झड़ते    हैं    फूल
तुम चुप हो जाती हो तो अच्छी  लगती हो

तुम पलके झुकाती हो तो लगती  हो  सुंदर
तुम पलके उठाती हो तो अच्छी लगती  हो

तुम   चलती   हो  तो  लुभाती   हो दिल को
तुम   रुक   जाती  हो  तो  अच्छी लगती हो

खुली   ज़ुल्फों    में    बनाती   हो    दीवाना
तुम जुल्फें  सजाती हो तो अच्छी लगती  हो

तुम पहनती हो सूट तो लगती हो बहुत खूब
तुम साडी में आती हो तो अच्छी लगती  हो

तुम    आती    हो    तो    आता   है    करार
तुम   शरमाती  हो  तो   अच्छी  लगती   हो

तुम   मुस्कुराती  हो  तो  अच्छी   लगती  हो

Tuesday, February 8, 2011

थी तमन्ना जिसकी वो जहाँ ख़त्म हुआ....


वो    प्यार    की    ज़मीन,   वो     मुहब्बत    का    आसमाँ    ख़त्म     हुआ

चल  रहा  था   जो  मुलाक़ातों   से       उनसे,     वो     कारवाँ   ख़त्म   हुआ

अब  बिखरे   हैं   तिनके  बस,   मेरा   वो   छोटा    सा   मका   ख़त्म    हुआ

घेर    लिया   है   खिजाओं   ने,    बहारों    का    वो   समाँ     ख़त्म    हुआ

महकती  थी  जिंदगी गुलाबों सी  जिसमें, महकता वो  गुलिस्ताँ  ख़त्म हुआ

जीने  को  तो जी रहे हैं दुनिया में, थी तमन्ना जिसकी  वो  जहाँ  ख़त्म हुआ