अब तलक मौजूद है...
सुनसान राहें, रुत सुहानी,
अब तलक मौजूद है...
साल दर साल कितने ही मौसम,
यूँ तो आते जाते रहे,
पेड़ पे लिखी इबारत पुरानी,
अब तलक मौजूद है...
कितनी ही बातों पे वक़्त की,
धूल यूँ तो जम गयी,
मेरी तस्वीर में तेरी इक निशानी,
अब तलक मौजूद है...
तेरे सारे खतों को यूँ तो,
बहुत पहले जला दिया,
दिल में उनकी महक दीवानी,
अब तलक मौजूद है...
कब बिछड़े थे आख़िरी बार,
कुछ ठीक से याद नहीं,
हाँ तब जो आया आँख में पानी,
अब तलक मौजूद है...
