यूँ तो मायूसी और उदासी
हमारी हर वक़्त की हमसफ़र है...
बस तुम्हारी यादें
हैं, जो कभी कभी चेहरे पे मुस्कान ले आती हैं !!
बस हार ही हार मिली,
मैं जब देखता हूँ बीते लम्हों के पन्ने,
बस तुम्हारे साथ की
जागीर थी, जो गम में सुकून दे जाती है !!
उन ख़ास लम्हों को
फिर से जीने का दिल तो बहुत करता है,
पर तुमसे ये हज़ारों
मील की दूरी, फिर बीच में आ जाती है !!
तुम्हारे नाम का दर्द हम दिल से जुदा ना होने देंगे कभी,
तुम तो गैर हो, पर
ये मेरी जागीर है, मेरे हिस्से में आती है !!
मैं तो भूल गया हूँ तुम्हें बिल्कुल, सच कहता हूँ..
बस धड़कन और साँसें
तुम्हारा नाम लेकर आती-जाती हैं !!
