जिंदगी आज फिर लगी बहुत खूबसूरतसालों बाद सुकून से जो बैठा मैं तन्हा..
कई साल से जैसे जी रहा था दिनों को मैं,
आज जिया मैंने दिन का हर लम्हा...
कई सवाल आज फिर,
अपने दिल से पूछे मैंने...
आज फिर सालों बाद,
अपने शौक के पौधे सीँचे मैंने...
आज फिर हर एक चीज़ को,
गौर से निहारा मैंने...
वक़्त की सीपियों से आज फिर,
यादों के मोती ढूँढे मैंने....
आज फिर अपनी धड़कनों के साज़ को,
देर तक सुना मैंने...
आज फिर आने वाले कल के लिए,
एक ख्वाब बुना मैंने....
सोचता रहा देर तक यही बात,
कि अब तक मैं जाने गुम था कहाँ...
जिंदगी आज फिर लगी बहुत खूबसूरत
सालों बाद सुकून से जो बैठा मैं तन्हा..
कई साल से जैसे जी रहा था दिनों को मैं,
आज जिया मैंने दिन का हर लम्हा...
