उन्होंने मुझे अकेला छोड़ दिया चौराहे पर,देखें, मेरी जिंदगी मुझे कहाँ ले जाती है !
साए भी साथ रहते हैं बस उजालों में ही,
अंधेरों में परछाई भी कहाँ साथ निभाती है !
किसे क्या मिले मुक़द्दर की बात है,
लहरें कहीं मोती दे जाती हैं, तो कहीं तूफान लाती हैं !
साथ हो जब खुशियाँ तो वो खुशियाँ नहीं लगती,
फिर रह - रहकर हमें उनकी यादें सताती हैं !
दिल की चोटें भी होती हैं कुछ अजीबो-ग़रीब,
यादों की हवा लगती है, कि उभर आती हैं !
उन्होंने मुझे अकेला छोड़ दिया चौराहे पर....
No comments:
Post a Comment