Tuesday, September 28, 2010

उन्होंने मुझे अकेला छोड़ दिया चौराहे पर....

उन्होंने    मुझे   अकेला   छोड़    दिया   चौराहे   पर,
देखें,   मेरी     जिंदगी    मुझे   कहाँ   ले   जाती   है !

साए   भी   साथ   रहते   हैं   बस   उजालों    में   ही,
अंधेरों   में   परछाई   भी  कहाँ   साथ  निभाती   है !

किसे     क्या     मिले     मुक़द्दर    की     बात     है,
लहरें कहीं मोती दे जाती हैं, तो कहीं तूफान लाती हैं !

साथ  हो  जब  खुशियाँ  तो वो  खुशियाँ नहीं लगती,
फिर  रह - रहकर   हमें   उनकी    यादें  सताती   हैं !

दिल   की  चोटें   भी  होती  हैं  कुछ  अजीबो-ग़रीब,
यादों   की   हवा  लगती   है,  कि  उभर  आती    हैं !

उन्होंने    मुझे   अकेला   छोड़   दिया   चौराहे   पर....

No comments: