ज़िंदगी उन्हीं पलों में है जिन्हें हो जिया हमने
ख़ुदा भी आख़िर में पूछेगा क्या किया हमने
आंसू भी मोती हैं और काँटे भी लगते हैं फूल
देखना ये है किसको किस तरह लिया हमने
चेहरा यूँ मुस्कुराता मिला कि पता न चला
कोई निशाँ न दिखे ज़ख्मों को यूँ सिया हमने
ज़िंदगी की किताब के कुछ पन्ने रखकर ख़ाली
उनका इंतज़ार किया और कुछ न किया हमने
हमारे ही दिल की न थी बात हर दिल की थी
बस बोलकर सारा इल्ज़ाम सर पर लिया हमने
दिल, चैन, सुकून, नींदें, देखिए इतना सब तो था
इसपर भी उनका कहना था कुछ न दिया हमने
ये ज़िंदगी भी ज़िंदगी सी तब ही है ‘ कँवल’
जब इसे किसी के नाम हो कर दिया हमने