Saturday, May 3, 2014

अब तलक मौजूद है...

इस दिल में वो कहानी,
अब तलक मौजूद है...
सुनसान राहें, रुत सुहानी,
अब तलक मौजूद है...

साल दर साल कितने ही मौसम,
यूँ तो आते जाते रहे,
पेड़ पे लिखी इबारत पुरानी,
अब तलक मौजूद है...

कितनी ही बातों पे वक़्त की,
धूल यूँ तो जम गयी,
मेरी तस्वीर में तेरी इक निशानी,
अब तलक मौजूद है...

तेरे सारे खतों को यूँ तो,
बहुत पहले जला दिया,
दिल में उनकी महक दीवानी,
अब तलक मौजूद है...

कब बिछड़े थे आख़िरी बार,
कुछ ठीक से याद नहीं,
हाँ तब जो आया आँख में पानी,
अब तलक मौजूद है...

Sunday, April 20, 2014

दिल को समझाया बहुत.....

दिल को समझाया बहुत, ना करे तुम्हारा इंतज़ार,
पर ये कहता था, मुझे बस एक यही काम आता है !!

लाख कोशिश की, कि भुला दूं नाम तुम्हारा,
पर क्या करूँ जो लबों पर, तुम्हारा ही नाम आता है !!

अजीब कश्मो-कश है, मेरे और दिल के बीच,
जब देखो ये मुझे छोड़, तुम्हारे साथ हो जाता है !!

दिल जीता है तुम्हें, धड़कनों से भी आगे जाकर,
ये धड़कना भूल जाता है, पर तुम्हें ज़रूर गुनगुनाता है !!

कोशिश की है कई बार, तुमसे दूर  कर लूँ खुद को,
हर बार मैं हार जाता हूँ, और दिल जीत जाता है !!

Saturday, April 19, 2014

जिए जाते हैं, एक तमन्ना में

जिए जाते हैं, एक तमन्ना में,
हैं कितनी ही तमन्नायें, इसी तमन्ना में !!

रखें हैं कई अरमान, सँजोकर दिल में,
शायद कभी पूरे हो जायें, इसी तमन्ना में !!

आँसू आए हर बार, जहाँ हम बिछड़े थे,
शायद वो पूछने आयें, इसी तमन्ना में !!

नफ़रत भी की, दिल ही दिल उन्हें बहुत,
शायद दिल से निकल जायें, इसी तमन्ना में !!

इबादत ना की कभी, किसी बुत की उनके सिवा,
वो बस मेरे खुदा बन जायें, इसी तमन्ना में !!

Monday, April 14, 2014

सोचता हूँ कुछ लिखूं यारों

सोचता हूँ कुछ लिखूं यारों,
पर कलम आगे बढ़ती नहीं !!

ना जाने क्यूँ कोई भी बात,
अब दिल में गहरी उतरती नहीं !!

रिश्ते खोखले लगते हैं अब,
जुदाई पर भी आँखें भरती नहीं !!

गुलाब, गुलाब अब कहाँ रहे,
गुलाब बिखरते हैं, खुश्बू बिखरती नहीं !!

चाहने को तो कौन नहीं चाहता,
पर चाहने से ही तो जिंदगी संवरती नहीं !!

आती है तो बर्बाद करती ही है,
गमों की आँधी यूँ ही गुजरती नहीं !!

हम इंसान हैं या बन गये हैं मशीन कोई,
गम गम सा, खुशी खुशी सी लगती नहीं !!

Tuesday, February 18, 2014

जीवन के आगामी पथ पर

 ज्वाला सी, रक्त-रंजित,
कल की स्मरतियाँ,
कितनी ही बार,
समा लेना चाहती हैं,
अपने में,
मेरे आज को...
दशकों से दबी,
अंतर्मन की एक पीड़ा,
बार-बार उभरती,
कुचलकर,
मेरे मनरूपी आँगन को,
आकर खड़ी होती,
अचानक,
करना चाहती है जैसे,
एक क्षण में,
सर्वस्व समाप्त...
और कहती,
कि चल उठ तू,
फिर से दिखा,
तुझमें है जीवट,
है तू,
मुझसे विशाल,
हरा कर,
फिर से,
अपने मान के आँगन को
मैं घबराकर,
सिहर उठता हूँ,
काँप जाता,
मेरा रोम, रोम,
फिर जुटाता हूँ,
हिम्मत,
खड़ा होता हूँ,
एक अडिग चट्टान सा,
और कहता उससे,
उसकी आँखों में आँखें डाल,
रोकना संभव नहीं,
मैं इसी भाँति,
बढ़ूंगा,
ना रुकुंगा,
जीवन के,
आगामी पथ पर,
निरंतर.....

Sunday, February 9, 2014

ये बारिश का मौसम

यारों, ये बारिश का मौसम, ये रिम झिम, झिम झिम,
याद दिला रहा है, वो अपने पुराने, मस्ती भरे दिन...
वो अजीबोग़रीब शर्ते,
वो ठहाके, वो एक दूसरे को छेड़ना,
बात बात पर लड़ना, झगड़ना,
फिर मान जाना, मना लेना,
साथ में भूखे रहना,
खाना, पीना, हर पल को जीना,
सुबह से शाम तक,
साथ करना मेहनत, बहाना पसीना,

फिर भी लगना कि, जल्दी बीत गया आज दिन,
यारों, ये बारिश का मौसम, ये रिम झिम झिम झिम,
याद दिला रहा है, वो अपने पुराने, मस्ती भरे दिन...

वो अपने बारिश के दिन,
फिर से लौटाए कोई,
हम से सब कुछ ले ले,
पर हमें साथ ले आए कोई,
जिंदगी गुज़रे उन्हीं,
शर्तो, झगड़ों, मस्ती, ठहाकों में,
और हमें फिर कभी,
जुदा ना कर पाए कोई,

यारों, जिंदगी, जिंदगी नहीं लगती तुम बिन,
यारों, ये बारिश का मौसम, ये रिम झिम झिम झिम,
याद दिला रहा है, वो अपने पुराने मस्ती भरे दिन...

Sunday, February 2, 2014

है कितना तुम्हें याद किया मैंने....

है कितना तुम्हें याद किया मैंने,
ये राहें, ये पेड़, ये फूल, ये फ़िज़ायें,
सब हैं गवाह इसके,
इनसे पूछना कभी कि,
इन्होंने कितनी ही बार देखा है,
मेरे ख्यालों में तुम्हें,
मेरा हाथ थामकर,
रखकर मेरे काँधे पर अपना सिर,
इनके सामने से गुज़रते हुए.....

पूछना इस झील के,
थमे नीले पानी से,
कितनी बार अक्श उभरा,
तुम्हारा इसमें,
और मैंने देखीं हैं इसमें,
तुम्हारी झील सी गहरी आँखें,
मेरे प्यार के काजल से,
सजते, सँवरते हुए....

इस गुलाब की पखुड़ियों पर,
अरसे से ठहरा,
एक हवा का झोका,
बताएगा तुम्हें कि,
कितनी बार रुकी हैं,
मेरी साँसें, मेरी धड़कन,
जब जब छुआ है,
मैंने इन पंखुड़ियों को,
धीरे से,
तुम्हारे गुलाबी लब समझकर,
सकुचाते हुए, डरते हुए....

है कितना तुम्हें याद किया मैंने....


Wednesday, January 8, 2014

अलविदा

जब   से    कुछ     दोस्त     अलविदा    कह      गये,
हम  सबके    बीच   होकर   भी    तन्हा   रह    गये !!

चले जाने  में  ज़रूर   उनकी  कुछ  मजबूरी    होगी,
पर  वो  ये भी तो  देखते  कि  हम  कहाँ   रह   गये !!

वो  आए   थे तो  जिंदगी  में  लेकर  आए  थे   बहार,
वो   क्या  गये  फूलों  के   भी   जैसे  रंग  बह   गये !!

अब  एक  मामूली  सा  झोका  भी  झकझोर  जाता  है,
वो साथ थे तो हम गमों का सैलाब भी हंसकर सह गये !!

वो  फिर  से  आ  जायें   दिल   यही  दुआ  माँगता   है,
पर  क्या  होगा  जो  वे  फिर   से  अलविदा  कह  गये !!