Friday, December 24, 2010

कितने ही लगा लो बंधन...

कितने   ही  लगा   लो   बंधन,
कितने   ही  पहरों  में   जकडो,
फूल    जो    खिले    है     तो,
खुशबू       बिखराती         है....

परेशान   कितना   हो    कोई,
गम की  हो  कैसी  भी  छाया,
अपना बच्चा  जब हँसे है  तो,
मुस्कान  आ   ही   जाती   है....

माँ   का   गुस्सा  भी  समझो,
इक     जादू       की    झप्पी,
गुस्से   में   भी    हमारा   वो,
भला    ही       चाहती       है....

भूलो   मत   अमीरी   में   भी,
कभी    ग़ुरबत     के      दिन,
दौलत     जैसे     आती     है,
वैसे   ही   चली    जाती     है....

दूर      जाने        वाले     से,
कितनी   थी   मुहब्बत   हमें,
रह  -   रहकर       आनेवाली,
उसकी   यादें    बतलाती   हैं....

कितने ही  लगा  लो   बंधन...

Wednesday, December 22, 2010

तू मेरे दिल में है आज भी

तू   मेरे   दिल   में   है   आज   भी,
साँसें  कहती  हैं...

तूने चाहा था मुझे, मैं नहीं  कहता,
यादें  कहती  हैं.....

मेरे कदमों में नहीं पहले जैसी बात,
राहें कहती हैं.....

मैं भी हो गया हूँ तन्हा, उनकी तरह,
रातें  कहती  हैं....

सहारा मिला किसी और का, तो मिला क्या,
बाहें  कहती  हैं....

वफ़ा ना कर सकेंगी, थोपो  ना  किसी  पर,
चाहें  कहती  हैं.....

(May, 2001)

Tuesday, December 14, 2010

दो नज़रिये- जिंदगी के

एक नज़रिया

मैं    खुश     नहीं,      उदास      नहीं
क्या  बात   है?     कुछ   ख़ास  नहीं

दुनिया  है,   या  इक  ढेर  गमों   का
कहीं से खुशी की इक आवाज़    नहीं

मैने     गम      खाया     है     बहुत
मुझे  अब  भूख  नहीं,  प्यास    नहीं

जी  रहा  हूँ  जिंदगी  बेमकसद  जैसे
कोई  उम्मीद  नहीं, कोई  आस  नहीं


दूसरा नज़रिया

मैं    खूब   हंसता   हूँ,     होता    हूँ    गमगीन     भी
हर  दिन   नई   है    जिंदगी,    और    बेहतरीन  भी

खुदा   ने   बख़्शी    हैं,    कितनी     नेमतें    हमको
उड़ने के लिए आकाश है, चलने के लिए  ज़मीन  भी

बंदिशें      जब      होंगी,     तब      देखा      जाएगा
आज मैं जी भर के खाता हूँ, मीठा  भी,  नमकीन  भी

तैयार    रहता  हूँ   रोज़,   नई   परवाज़    के    लिए
मैं     चुलबुला     भी      हूँ,     और     ज़हीन     भी

(आप कौन सा नज़रिया चुनेंगे?)

Wednesday, December 8, 2010

दिल को सब्र आता नहीं.....

तुम्हारे  बिना  मुस्कुराने  को  जी अब चाहता  नहीं
एक  पल   को  भी   अब  दिल  से  गम जाता  नहीं

तुम्हें   तो   हमारी   याद   भी   नहीं   आती    होगी
एक  ये  दिल  है,  जो  तुम्हें   भूल    पाता       नहीं

काम में लगे रहते हैं, दिखाने  के लिए  दुनिया को
पर  हमारा   दिल,   साथ    हमारा   निभाता  नहीं

करते  हैं  हम  इंतजार  तुम्हारा,  हर   शाम,  सच
तुम  आए  हो, कोई  झूठी  खबर  भी  सुनाता नहीं

तुमने  दूर  तक  साथ निभाने की खाईं थीं कसमें
तुम  भूल  गये  हो  हमें, दिल  को सब्र आता नहीं