Sunday, April 20, 2014

दिल को समझाया बहुत.....

दिल को समझाया बहुत, ना करे तुम्हारा इंतज़ार,
पर ये कहता था, मुझे बस एक यही काम आता है !!

लाख कोशिश की, कि भुला दूं नाम तुम्हारा,
पर क्या करूँ जो लबों पर, तुम्हारा ही नाम आता है !!

अजीब कश्मो-कश है, मेरे और दिल के बीच,
जब देखो ये मुझे छोड़, तुम्हारे साथ हो जाता है !!

दिल जीता है तुम्हें, धड़कनों से भी आगे जाकर,
ये धड़कना भूल जाता है, पर तुम्हें ज़रूर गुनगुनाता है !!

कोशिश की है कई बार, तुमसे दूर  कर लूँ खुद को,
हर बार मैं हार जाता हूँ, और दिल जीत जाता है !!

Saturday, April 19, 2014

जिए जाते हैं, एक तमन्ना में

जिए जाते हैं, एक तमन्ना में,
हैं कितनी ही तमन्नायें, इसी तमन्ना में !!

रखें हैं कई अरमान, सँजोकर दिल में,
शायद कभी पूरे हो जायें, इसी तमन्ना में !!

आँसू आए हर बार, जहाँ हम बिछड़े थे,
शायद वो पूछने आयें, इसी तमन्ना में !!

नफ़रत भी की, दिल ही दिल उन्हें बहुत,
शायद दिल से निकल जायें, इसी तमन्ना में !!

इबादत ना की कभी, किसी बुत की उनके सिवा,
वो बस मेरे खुदा बन जायें, इसी तमन्ना में !!

Monday, April 14, 2014

सोचता हूँ कुछ लिखूं यारों

सोचता हूँ कुछ लिखूं यारों,
पर कलम आगे बढ़ती नहीं !!

ना जाने क्यूँ कोई भी बात,
अब दिल में गहरी उतरती नहीं !!

रिश्ते खोखले लगते हैं अब,
जुदाई पर भी आँखें भरती नहीं !!

गुलाब, गुलाब अब कहाँ रहे,
गुलाब बिखरते हैं, खुश्बू बिखरती नहीं !!

चाहने को तो कौन नहीं चाहता,
पर चाहने से ही तो जिंदगी संवरती नहीं !!

आती है तो बर्बाद करती ही है,
गमों की आँधी यूँ ही गुजरती नहीं !!

हम इंसान हैं या बन गये हैं मशीन कोई,
गम गम सा, खुशी खुशी सी लगती नहीं !!