Thursday, September 29, 2011

भ्रष्टाचार...


एक बड़ा शोर है,
बादल घनघोर है,
इसने मचाया देखो,
आज हाहाकार है !!

देश रूपी पेड़ की,
जड़ो को जो खा रहा,
ये तो एक दीमक,
बड़ा ख़ूँख़ार है !!

ये एक राक्षस,
एक दानव जैसा,
देश को खाने के लिए,
बैठा तैयार है !!

गिरा दिया जिसने,
दुनिया की नज़रों से,
किया जिसने
हम सबको शर्मसार है !!

जानता हूँ मैं भी इसे,
जानते हैं आप भी,
ये और कोई नहीं है,
ये भ्रष्टाचार है !!


इसने है कपड़ा छीना,
इसने है छत छीनी,
इसने ग़रीबों का,
छीना नीवाला है !!

इसने बदले मेहनत के,
है मंहगाई दी,
जिसने ग़रीबो की,
कमर को तोड़ डाला है !!

अब ईद ईद सी ना,
दीवाली दीवाली लगे,
इसने तो निकाला,
सबका दीवाला है !!

इसने स्विस बैंक भरे,
अपने खाली बैंक करे,
और सारा दोष,
आम जनता पे डाला है !!

दो नहीं, सौ नहीं,
लाख या हज़ार नहीं,
इसने अरबों, करोड़ो का,
किया आर-पार है !!

जानता हूँ मैं भी इसे,
जानते हैं आप भी,
ये और कोई नहीं है,
ये भ्रष्टाचार है !!

 
जो साधते बस,
अपना ही मतलब,
ऐसे और नेता अब,
हमें नहीं चाहियें !!

हमे और हमारे देश को आज क्या चाहिए--

भरत सी ईमानदारी,
राम सा कल्याणकारी,
मोहम्मद साहब जैसा,
हितकारी हमें चाहिए !!

अशोक सा धर्माधिकारी,
अकबर सा भाईचारी,
वीरता का राणा सा,
पुजारी हमें चाहिए !!

खोखले वादे ना चाहें,
कोई झूठी आस नहीं,
अब एक ठोस,
शुरुआत हमें चाहिए!!

हमें लक्ष्मीबाई,
हमको भगतसिंह,
हमें गाँधी चाहिए,
सुभाष हमें चाहिए !!

आज फिर त्याग कर दे
जो अपने बेटे,
माँ के रूप में,
फिर पन्ना हमें चाहिए !!

देशहित में जो जान,
कर दे अपनी न्योछावर,
हर घर में एक,
अन्ना हमें चाहिए !!

घर घर में एक,
अन्ना हमें चाहिए !!