मेरा बेटा, मेरी मुस्कान को देखता है
और खिलखिलाता है
मैं उसकी और एक कदम बढ़ाता हूँ
वो मेरी और दौड़ जाता है
हम उसे कुछ भी कहें,
वो बस मुस्कुराता है, मुस्कुराता है
जब कोई चोट लगती है
उसे एक पल में भूल जाता है
उस आनंद का बयान नहीं,
जो उसे गोद में लेकर आता है
कितना अच्छा लगता है
जब अपनी भाषा में गुनगुनाता है....
कितना अच्छा हो गर
हम सब ऐसे ही बन जायें
जब भी किसी से मिलें
तो मुस्कुरायें, खिलखिलायें
कोई हमारी और एक कदम बढ़ाए तो
हम उसकी और दौड़ जायें
कोई गुस्सा भी करे तो
हम दिल जीतने वाली बात कह जायें
कोई गर दिल को चोट पहुँचाए तो
उसे एकदम भूल जायें
जब भी मिले समय तो
मस्ती में गुनगुनायें
आओ, सचमुच का जीवन जी जायें
चलो फिर से बच्चे बन जायें.....
और खिलखिलाता है
मैं उसकी और एक कदम बढ़ाता हूँ
वो मेरी और दौड़ जाता है
हम उसे कुछ भी कहें,
वो बस मुस्कुराता है, मुस्कुराता है
जब कोई चोट लगती है
उसे एक पल में भूल जाता है
उस आनंद का बयान नहीं,
जो उसे गोद में लेकर आता है
कितना अच्छा लगता है
जब अपनी भाषा में गुनगुनाता है....
कितना अच्छा हो गर
हम सब ऐसे ही बन जायें
जब भी किसी से मिलें
तो मुस्कुरायें, खिलखिलायें
कोई हमारी और एक कदम बढ़ाए तो
हम उसकी और दौड़ जायें
कोई गुस्सा भी करे तो
हम दिल जीतने वाली बात कह जायें
कोई गर दिल को चोट पहुँचाए तो
उसे एकदम भूल जायें
जब भी मिले समय तो
मस्ती में गुनगुनायें
आओ, सचमुच का जीवन जी जायें
चलो फिर से बच्चे बन जायें.....


