Saturday, November 27, 2010

चलो फिर से बच्चे बन जायें.....

मेरा बेटा, मेरी मुस्कान को देखता है
और खिलखिलाता है
मैं उसकी और एक कदम बढ़ाता हूँ
वो मेरी और दौड़ जाता है
हम उसे कुछ भी कहें,
वो बस मुस्कुराता है, मुस्कुराता है
जब कोई चोट लगती है
उसे एक पल में भूल जाता है
उस आनंद का बयान नहीं,
जो उसे गोद में लेकर आता है
कितना अच्छा लगता है
जब अपनी भाषा में गुनगुनाता है....

कितना अच्छा हो गर
हम सब ऐसे ही बन जायें
जब भी किसी से मिलें
तो मुस्कुरायें, खिलखिलायें
कोई हमारी और एक कदम बढ़ाए तो
हम उसकी और दौड़ जायें
कोई गुस्सा भी करे तो
हम दिल जीतने वाली बात कह जायें
कोई गर दिल को चोट पहुँचाए तो
उसे एकदम भूल जायें
जब भी मिले समय तो
मस्ती में गुनगुनायें
आओ, सचमुच का जीवन जी जायें
चलो फिर से बच्चे बन जायें.....

Friday, November 19, 2010

जिंदगी कभी सहेली, कभी पहेली...

जिंदगी कभी सहेली, कभी पहेली...

कभी लगती इतनी अपनी कि,
मैं खुद ही जिंदगी हूँ...
कभी इतनी पराई कि,
मैं इसे जानता ही नहीं !

कभी इतनी खुशियों का समंदर,
कि डूब मरता हूँ इसमें...
कभी एक मरुस्थल कि,
पानी की एक बूँद को तरस जाता हूँ !

कभी ये केवल दाल-रोटी की चिंता,
तो कभी एक हसीन स्वपन,
कि कोई चिंता ही नहीं !

जिंदगी कभी प्रेमिका बनकर,
अपने आगोश में ले लेती हैं..
तो कभी विरह की अग्नि में,
जलने को छोड़ देती है !

कभी झील सी शांत,
तो कभी सागर सी क्लांत..

समझ ना सका कि क्या है जिंदगी,
अब लगता है कि यह परिवर्तन ही जिंदगी है !

Saturday, November 13, 2010

किस्मत ने ही साथ नहीं दिया....

किस्मत     ने     ही     साथ     नहीं      दिया,
हौंसले     तो     बहुत     किए     थे         मैंने...

क्या   करता   जब   दूर   होती  गयी  मंज़िल,
कदम      तो       बढ़ा      दिए      थे        मैंने...

यह  और  बात  है  कि उन्हें  पता  भी न चला,
दिल     में     तो     बसा      लिए     थे    मैंने...

गर्दिशें     बस       बढ़ती   -      बढ़ती    गयीं,
यूँ     तो      दिए     जला     लिए     थे    मैंने...

नाम सुनकर उनका जाने कहाँ से भर आई आँखें,
रात     भर     आँसू    बहा    तो   लिए   थे    मैंने...

Saturday, November 6, 2010

दिल चाहे ना चाहे, रुखसत लोग हो जाते हैं...

दिल  चाहे  ना चाहे,  रुखसत लोग  हो जाते हैं,
उठते  नहीं  कभी  भी, गहरी  नींद सो जाते हैं !

बाँध जाते हैं सभी को, बस  यादों की ज़ंजीरों में;
मिलते  हैं  फिर  हमको,  बस  वे  तस्वीरों में;
मुस्काती  तस्वीरों  को,  हम देख  रो  जाते हैं;
दिल  चाहे  ना चाहे, रुखसत लोग हो जाते हैं....

नज़र आयें जो हमें, तो उन्हें आवाज़ दे बुला लें;
एक  बार  फिर उन्हें, अपने  गले हम लगा लें;
पर सुनते हैं किसकी बातें, एक बार जो जाते हैं;
दिल  चाहे  ना चाहे, रुखसत  लोग हो जाते हैं....

एक ना एक दिन, सबको इस दुनिया से जाना है;
हर  इन्सा एक दिन जग से, हो जाता बेगाना है;
ना  जाने  कैसे-कैसे,  हम दिल को समझाते हैं;
दिल  चाहे  ना चाहे, रुखसत  लोग हो जाते  हैं....
उठते  नहीं  कभी  भी, गहरी  नींद  सो  जाते हैं.....