Saturday, April 30, 2016

रखूं दिल में सँजोकर

तेरी किस किस बात को, रखूं दिल में सँजोकर.. तेरी मुस्कुराहट, तेरी हर आहट, तेरी आँखें, तेरी बातें, हर वो अहसास, जो छू जाता है, दिल को, जब जब तू, करीब होती है, तेरे हाथों की, नर्माहट, तेरी सांसो की, गर्माहट, तेरी हर छूअन, जो उतरती है, सीधे दिल में, दिल तो करता है, रख लूँ , सब कुछ तुम्हारा, दिल में, और रखूं उसे, सबसे करीब...

खाली से लम्हें पड़े हैं यहीं पर




खाली से लम्हें पड़े हैं यहीं पर थोड़े से छत पर, थोड़े ज़मीं पर अलसायी सी धूप उतरी है आँगन, अनमनी सी छाया छिप गयी कहीं पर परिंदें चोंच में तिनके लिए जा रहे हैं ज़रूर घरोंदे बना रहे हैं कहीं पर सुस्त सी दोपहर ने दे दी है दस्तक, रुक गयी है पुरवईया ठिठककर कहीं पर नयी कोपलो से फिर सज़ा गया है पीपल पर वो नटखट बचपन रह गया कहीं पर..

कुछ तो है, जो बाकी है

कुछ तो है, जो बाकी है, तेरे मेरे बीच, अब भी... जुदा होके भी, कहाँ हुए जुदा, कितनी ही यादें, कितनी ही बातें, कितने ही अहसास, अब भी हैं करीब, दिल के, रूह के... कितने ही लम्हे, लौट आते हैं, जब जब, गुज़रता हूँ, उन राहों से, जिनसे गुज़रे थे, हम दोनो कभी, साथ साथ.... कितने ही, किताब के पन्ने, महकते हैं, फिर से, जिनमें उभरा था, अक्स तुम्हारा कभी, उन्हें पढ़ते पढ़ते... साथ चलती हो, डाले मेरे हाथों में हाथ, हर एक लफ्ज़ के, जो भी लिखा, मैंने कभी, तुम्हारे लिए... बोलो, कहाँ जुदा हुए, और, होंगे भी नहीं कभी...