उनसे होती कुछ और बात, तो अच्छा होता
कुछ देर और चलती वो मुलाकात, तो अच्छा होता
उनकी ही सूरत को, मैं रखता था आँखों में
उनका ही नाम लिखकर, मैं रखता था हाथों में
वो भी समझते मेरे ज़ज्बात, तो अच्छा होता
उस एक पल का ही, सारे दिन मे इंतज़ार होता था
गुजरते हुए उनकी गली में, जब उनका दीदार होता था
काश, होता मेरा चेहरा भी उनके लिए ख़ास,तो अच्छा होता
उनकी हर झलक, मेरे लिए याद बन गयी
उनकी एक मुस्कान, मेरे लिए तख्तो ताज़ बन गयी
उनके दिल में भी होता गर ये अहसास, तो अच्छा होता
मैंने उस खुदा से, कहाँ कुछ ज़्यादा माँगा था
मैंने कहाँ फलक माँगा था,कहाँ जमी में साझा माँगा था
बस होता मेरे हाथ में उनका हाथ, तो अच्छा होता
उनसे होती कुछ और बात, तो अच्छा होता
कुछ देर और चलती वो मुलाकात, तो अच्छा होता

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