नूर लेकर आया इक चेहरा
लेकर आया खुशियों को संग
उसके आने जैसे
जीवन को मकसद मिल गया
बन गये रिश्ते अनेकों
अनेकों को रिश्ता मिल गया
उसके आने से जहाँ में
सारी उलझनों को मिल गया विराम
उस परी के हाथ जैसे जादू की छड़ी है
जिसके छूने से मिली हैं खुशियाँ तमाम
उसके हर स्पर्श से जैसे
पड़ती हैं, पड़ती हैं ठंडी बौछारें
उस इक फूल के खिलने से
आ गयीं हर तरफ़ बहारें
जीवन में इक नयी सुबह हुई है
भर गयी मनों में उमंग
नूर लेकर आया इक चेहरा,
लेकर आया खुशियों को संग
(मैंने यह कविता अपनी प्यारी बेटी यशिका के जन्म के बाद लिखी थी, जो २६ जनवरी को ५ (पाँच) वर्ष की हो रही है !)
लेकर आया खुशियों को संग
उसके आने जैसे
जीवन को मकसद मिल गया
बन गये रिश्ते अनेकों
अनेकों को रिश्ता मिल गया
उसके आने से जहाँ में
सारी उलझनों को मिल गया विराम
उस परी के हाथ जैसे जादू की छड़ी है
जिसके छूने से मिली हैं खुशियाँ तमाम
उसके हर स्पर्श से जैसे
पड़ती हैं, पड़ती हैं ठंडी बौछारें
उस इक फूल के खिलने से
आ गयीं हर तरफ़ बहारें
जीवन में इक नयी सुबह हुई है
भर गयी मनों में उमंग
नूर लेकर आया इक चेहरा,
लेकर आया खुशियों को संग
(मैंने यह कविता अपनी प्यारी बेटी यशिका के जन्म के बाद लिखी थी, जो २६ जनवरी को ५ (पाँच) वर्ष की हो रही है !)
