आँख जब खुली, तो फि र ना लगी,रात फिर मुझे, याद आ गया था वो...
तू भूल जा मुझे, पर मैं जहन में हूँ तेरे,
आज फिर मुझे, समझा गया था वो...
आग दीदारे-यार की, जो बुझ गयी थी अब,
आग फिर वही, दहका गया था वो....
बेखुदी मेरी, इस हद तक बढ़ी,
लगा था जैसे, पास आ गया था वो.....
एक वेहम था मुझे, उससे दूर हूँ मैं अब,
दिल ही में था मेरे, कहाँ गया था वो ...
रात फिर मुझे, याद आ गया था वो...
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