Monday, October 4, 2010

फिर मुझे याद आ गया था वो....

आँख   जब   खुली,   तो   फि र  ना    लगी,
रात   फिर  मुझे,  याद   आ   गया   था  वो...

तू   भूल  जा  मुझे,  पर  मैं  जहन में हूँ तेरे,
आज   फिर   मुझे,  समझा   गया   था   वो...

आग  दीदारे-यार की,  जो बुझ गयी थी अब,
आग    फिर    वही,    दहका   गया   था  वो....

बेखुदी    मेरी,     इस     हद     तक     बढ़ी,
लगा   था   जैसे,   पास   आ   गया   था  वो.....

एक   वेहम  था  मुझे,   उससे   दूर हूँ मैं अब,
दिल    ही   में  था  मेरे,   कहाँ   गया  था वो ...

रात   फिर  मुझे,  याद   आ   गया   था  वो...

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