Saturday, April 30, 2011

दर्द का समंदर कम नहीं होता......




दर्द      का      समंदर     कम     नहीं      होता,
बस    इतना    ही     है,   कि    मैं  नही  रोता !

ना  जाने  कौन   सी चीज़  मुझसे खो  गयी   है,
जिससे   बोझ   मन   का   हल्का  नहीं  होता !


जैसे     मुझे     रोज़       सज़ा    मिलती    है,
बस   कोई   मुक़दमा  मुकम्मिल  नहीं  होता !







मैं      जिंदगी       जीऊँगा       जी    भरकर,
देखता  हूँ,   मुझे   क्या   हासिल   नहीं  होता !

ए-वक़्त    अपनी   धार    और     तेज़    कर,
तेरे चाकू का मेरे इरादों पर असर नहीं  होता !

उस एक परवर के  आगे है  सब नत-मस्तक
एक पत्ता भी ना हिलता,  जो वो  नहीं  होता !

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