Saturday, April 16, 2011

क्या करूँ जो हर पल, याद तुम्हारी आती है...



तुमसे    ये      दूरी,      पागल    मुझे    बनाती   है
क्या    करूँ    जो   हर  पल,    याद  तुम्हारी  आती  है...

हर  पल,  हर   दिन,   एक     चुभन     सी     रहती  है
यूँ  तो   है   सब    कुछ,  पर   एक   घुटन सी  रहती है
अब कोई भी  बात,  ना  दिल  को   सुकून    दिलाती है
क्या   करूँ    जो  हर   पल,  याद  तुम्हारी   आती है...


एक -  एक   पल,  जाने   क्यूँ     साल    सा  लगता है
जीना  अब  तुम्हारे  बिन, एक  सवाल   सा  लगता है
सोचूँ जो खुद को तेरे बिन, जान  निकल  सी  जाती  है
क्या  करूँ  जो  हर   पल,   याद    तुम्हारी    आती  है.....

1 comment:

Monika Saini said...

very nice poem,,,,,,,,,,,,,