तुमसे ये दूरी, पागल मुझे बनाती है
क्या करूँ जो हर पल, याद तुम्हारी आती है...
हर पल, हर दिन, एक चुभन सी रहती है
यूँ तो है सब कुछ, पर एक घुटन सी रहती है
अब कोई भी बात, ना दिल को सुकून दिलाती है
क्या करूँ जो हर पल, याद तुम्हारी आती है...
एक - एक पल, जाने क्यूँ साल सा लगता है
जीना अब तुम्हारे बिन, एक सवाल सा लगता है
सोचूँ जो खुद को तेरे बिन, जान निकल सी जाती है

1 comment:
very nice poem,,,,,,,,,,,,,
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