Wednesday, May 4, 2011

वैसे मैं यारों उस पर मरता नहीं...

कुछ   भी  करने   को   दिल  अब   करता   नहीं
वैसे     मैं     यारों     उस     पर     मरता    नहीं...

हरपल     मेरे   ख्यालों      में    रहती     है   वो
मेरी    रगों   में   लहू    बनकर    बहती  है   वो
मेरी   हर   साँस   चलती  है उसका नाम  लेकर
मेरी     नींदों   में    ख्वाबों    में    रहती   है  वो
उसके  सिवा  कोई  ख्वाब  आँखों  से  गुज़रता  नहीं
वैसे   मैं     यारों     उस     पर      मरता    नहीं...

 रहता  हूँ  बेचैन  उसकी  एक  झलक   के लिए
आहें  भरता  हूँ  उन  ज़ुल्फो  की महक के लिए
पढ़ता  हूँ   उसे    ही    किताबों    में    अब   तो
करता हूँ इंतज़ार उसका शाम से शाम तक के लिए
जाने   कैसा   है  उसका खुमार जो उतरता नहीं
वैसे    मैं    यारों    उस      पर     मरता     नहीं...

रात-दिन,   सुबह-शाम   उसकी   याद   आती है
बस   वो   सिर्फ़   वो   ही   दिल   को    भाती  है
करता  हूँ   लाख   कोशिश    भुलाने   की    उसे
पर   मेरी    हर    कोशिश    बेकार    जाती    है
कोई पल ऐसा नहीं जब मैं उसके लिए तड़पता  नहीं
वैसे    मैं    यारों    उस    पर       मरता     नहीं...

December, 2000

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