Tuesday, February 22, 2011

मुझे गम होता क्यूँ है???

ना जाने तेरे और किसी के हो जाने का,
मुझे गम होता क्यूँ है;
मैं जानता हूँ तू मेरी हो जाए मुमकिन नहीं,
फिर भी तेरी याद आने पर,
दिल रोता क्यूँ है;

तेरी नज़रों की भाषा हम समझ ना सके,
शायद उसी की सज़ा काट रहे हैं हम;
तेरे दिल का इरादा हम समझ ना सके,
शायद उसी की सज़ा काट रहे हैं हम;

पर मेरे बस में ही क्या था,
तेरा इरादा जाने बगैर भी तो,
चैन नहीं आता मुझको;
मैंने वही किया जो मेरे दिल ने,
करने के लिए मजबूर किया मुझको;

अंजाम भी वही हुआ,
जिसकी कुछ कुछ उम्मीद थी मुझे;
मेरा दिल टूटकर बिखर गया,
और हम पा ना सके तुझे;

हुआ बिल्कुल वैसा ही जैसी उम्मीद थी--
फिर भी दिल, तेरा मेरे हो जाने के,
झूठे सपने संजोता क्यूँ है;
ना जाने तेरे और किसी के हो जाने का,
मुझे गम होता क्यूँ है???

December, 1996

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