वो प्यार की ज़मीन, वो मुहब्बत का आसमाँ ख़त्म हुआ
चल रहा था जो मुलाक़ातों से उनसे, वो कारवाँ ख़त्म हुआ
अब बिखरे हैं तिनके बस, मेरा वो छोटा सा मका ख़त्म हुआ
घेर लिया है खिजाओं ने, बहारों का वो समाँ ख़त्म हुआ
महकती थी जिंदगी गुलाबों सी जिसमें, महकता वो गुलिस्ताँ ख़त्म हुआ
जीने को तो जी रहे हैं दुनिया में, थी तमन्ना जिसकी वो जहाँ ख़त्म हुआ

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