कौन कहता है तन्हा हूँ मैं,
हर वक़्त तो कोई ना कोई मेरे साथ है
दिन में जलता हुआ दिन है
रात में झुलसती रात है
चारों ओर मेरे अरमानों के
मुरझाए हुए फूल भी तो हैं
जो चुभते हैं बहुत तेज़
तेरी यादों के शूल भी तो हैं
जिसमें मैं खुद बह जाने वाला हूँ
साथ मेरे आँसुओं की बरसात है
कौन कहता है तन्हा हूँ मैं,
हर वक़्त तो कोई ना कोई मेरे साथ है
जो जलाती है मुझे हर पल
दर्द की वो आग भी तो है
जो चाहता है मिटाना मुझे
गमों का वो शैलाब भी तो है
जो बन गयी है जल जाने से
साथ मेरे ख़्वाबों की राख है
कौन कहता है तन्हा हूँ मैं,
हर वक़्त तो कोई ना कोई मेरे साथ है
दिन में जलता हुआ दिन है
रात में झुलसती रात है....

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