कुछ तो है,
जो बाकी है,
तेरे मेरे बीच,
अब भी...
जुदा होके भी,
कहाँ हुए जुदा,
कितनी ही यादें,
कितनी ही बातें,
कितने ही अहसास,
अब भी हैं करीब,
दिल के, रूह के...
कितने ही लम्हे,
लौट आते हैं,
जब जब,
गुज़रता हूँ,
उन राहों से,
जिनसे गुज़रे थे,
हम दोनो कभी,
साथ साथ....
कितने ही,
किताब के पन्ने,
महकते हैं,
फिर से,
जिनमें उभरा था,
अक्स तुम्हारा कभी,
उन्हें पढ़ते पढ़ते...
साथ चलती हो,
डाले मेरे हाथों में हाथ,
हर एक लफ्ज़ के,
जो भी लिखा,
मैंने कभी,
तुम्हारे लिए...
बोलो,
कहाँ जुदा हुए,
और,
होंगे भी नहीं कभी...
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