Monday, April 14, 2014

सोचता हूँ कुछ लिखूं यारों

सोचता हूँ कुछ लिखूं यारों,
पर कलम आगे बढ़ती नहीं !!

ना जाने क्यूँ कोई भी बात,
अब दिल में गहरी उतरती नहीं !!

रिश्ते खोखले लगते हैं अब,
जुदाई पर भी आँखें भरती नहीं !!

गुलाब, गुलाब अब कहाँ रहे,
गुलाब बिखरते हैं, खुश्बू बिखरती नहीं !!

चाहने को तो कौन नहीं चाहता,
पर चाहने से ही तो जिंदगी संवरती नहीं !!

आती है तो बर्बाद करती ही है,
गमों की आँधी यूँ ही गुजरती नहीं !!

हम इंसान हैं या बन गये हैं मशीन कोई,
गम गम सा, खुशी खुशी सी लगती नहीं !!

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