Friday, November 11, 2011

तेरे बिन कितना अधूरा हूँ मैं....

तेरे बिन कितना अधूरा  हूँ   मैं,
आज      है      जाना        मैंने..

के जैसे बाती   दिए   से     कोई
कोई   मोती   सीप   से     जैसे....
पानी   बिन    ज्यों       मछली,
तेरे   बिन   तड़पता    हूँ    ऐसे...

तेरे बिन जीना नहीं है  मुमकिन
आज       है        माना      मैंने....

तेरे बिन कितना अधूरा  हूँ    मैं,
आज     है      जाना           मैंने..

के     जैसे     दिल   से  धड़कन,
धरती     से       मौसम      जैसे...
जैसे         फूल       से    खुश्बू,
छवि      से        दर्पण     जैसे...

दुनिया नहीं है तेरी चाहत  बिन,
आज    है      पहचाना     मैंने...
तेरे   बिन  कितना अधूरा हूँ  मैं,
आज       है       जाना        मैंने..

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