बूँदों का सागर मे मिल जाना,
कलियों का सुबह को खिल जाना,
हवा से पत्तियों का हिल जाना,
नज़र से मिलने पर नज़र दिल जाना,
ये क्यूँ होता है ?
इसका क्या सबब है ?
बूँदें होती है सागर से मिलने को प्यासी,
इसलिए वे सागर में मिल जाती हैं !
कलियों को होती है भवरों से चाहत,
इसलिए वे सुबह को खिल जाती हैं !
हवा छू देती है पत्तियों को प्यार से,
इसलिए वे झूमकर हिल जाती हैं !
प्यार होना होता है जब भी कभी,
एक दूसरे से नज़रें मिल जाती हैं !
यूँ ही होता है प्यार,
और प्यार रब है !
कलियों का सुबह को खिल जाना,
हवा से पत्तियों का हिल जाना,
नज़र से मिलने पर नज़र दिल जाना,
ये क्यूँ होता है ?
इसका क्या सबब है ?
बूँदें होती है सागर से मिलने को प्यासी,
इसलिए वे सागर में मिल जाती हैं !
कलियों को होती है भवरों से चाहत,
इसलिए वे सुबह को खिल जाती हैं !
हवा छू देती है पत्तियों को प्यार से,
इसलिए वे झूमकर हिल जाती हैं !
प्यार होना होता है जब भी कभी,
एक दूसरे से नज़रें मिल जाती हैं !
यूँ ही होता है प्यार,
और प्यार रब है !

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