Sunday, November 6, 2011

और प्यार रब है...

बूँदों   का  सागर   मे     मिल   जाना,
कलियों का सुबह  को  खिल   जाना,
हवा से   पत्तियों    का  हिल   जाना,
नज़र से मिलने पर नज़र दिल जाना,

ये   क्यूँ    होता    है ?
इसका क्या सबब है ?

बूँदें होती है सागर से मिलने को प्यासी,
इसलिए    वे  सागर  में मिल जाती हैं !
कलियों को  होती  है  भवरों  से  चाहत,
इसलिए   वे   सुबह  को  खिल जाती हैं !
हवा   छू   देती  है पत्तियों को प्यार से,
इसलिए   वे    झूमकर   हिल  जाती हैं !
प्यार   होना    होता   है  जब भी  कभी,
एक   दूसरे   से  नज़रें  मिल  जाती हैं !

यूँ  ही होता  है  प्यार,
और    प्यार   रब  है !


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