एक नज़रिया
मैं खुश नहीं, उदास नहीं
क्या बात है? कुछ ख़ास नहीं
दुनिया है, या इक ढेर गमों का
कहीं से खुशी की इक आवाज़ नहीं
मैने गम खाया है बहुत
मुझे अब भूख नहीं, प्यास नहीं
जी रहा हूँ जिंदगी बेमकसद जैसे
कोई उम्मीद नहीं, कोई आस नहीं
दूसरा नज़रिया
मैं खूब हंसता हूँ, होता हूँ गमगीन भी
हर दिन नई है जिंदगी, और बेहतरीन भी
खुदा ने बख़्शी हैं, कितनी नेमतें हमको
उड़ने के लिए आकाश है, चलने के लिए ज़मीन भी
बंदिशें जब होंगी, तब देखा जाएगा
आज मैं जी भर के खाता हूँ, मीठा भी, नमकीन भी
तैयार रहता हूँ रोज़, नई परवाज़ के लिए
मैं चुलबुला भी हूँ, और ज़हीन भी
(आप कौन सा नज़रिया चुनेंगे?)
मैं खुश नहीं, उदास नहीं
क्या बात है? कुछ ख़ास नहीं
दुनिया है, या इक ढेर गमों का
कहीं से खुशी की इक आवाज़ नहीं
मैने गम खाया है बहुत
मुझे अब भूख नहीं, प्यास नहीं
जी रहा हूँ जिंदगी बेमकसद जैसे
कोई उम्मीद नहीं, कोई आस नहीं
दूसरा नज़रिया
मैं खूब हंसता हूँ, होता हूँ गमगीन भी
हर दिन नई है जिंदगी, और बेहतरीन भी
खुदा ने बख़्शी हैं, कितनी नेमतें हमको
उड़ने के लिए आकाश है, चलने के लिए ज़मीन भी
बंदिशें जब होंगी, तब देखा जाएगा
आज मैं जी भर के खाता हूँ, मीठा भी, नमकीन भी
तैयार रहता हूँ रोज़, नई परवाज़ के लिए
मैं चुलबुला भी हूँ, और ज़हीन भी
(आप कौन सा नज़रिया चुनेंगे?)

1 comment:
naturally dusra najaria behtar hai..keep it up
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