Friday, December 24, 2010

कितने ही लगा लो बंधन...

कितने   ही  लगा   लो   बंधन,
कितने   ही  पहरों  में   जकडो,
फूल    जो    खिले    है     तो,
खुशबू       बिखराती         है....

परेशान   कितना   हो    कोई,
गम की  हो  कैसी  भी  छाया,
अपना बच्चा  जब हँसे है  तो,
मुस्कान  आ   ही   जाती   है....

माँ   का   गुस्सा  भी  समझो,
इक     जादू       की    झप्पी,
गुस्से   में   भी    हमारा   वो,
भला    ही       चाहती       है....

भूलो   मत   अमीरी   में   भी,
कभी    ग़ुरबत     के      दिन,
दौलत     जैसे     आती     है,
वैसे   ही   चली    जाती     है....

दूर      जाने        वाले     से,
कितनी   थी   मुहब्बत   हमें,
रह  -   रहकर       आनेवाली,
उसकी   यादें    बतलाती   हैं....

कितने ही  लगा  लो   बंधन...

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