उठते नहीं कभी भी, गहरी नींद सो जाते हैं !
बाँध जाते हैं सभी को, बस यादों की ज़ंजीरों में;
मिलते हैं फिर हमको, बस वे तस्वीरों में;
मुस्काती तस्वीरों को, हम देख रो जाते हैं;
दिल चाहे ना चाहे, रुखसत लोग हो जाते हैं....
नज़र आयें जो हमें, तो उन्हें आवाज़ दे बुला लें;
एक बार फिर उन्हें, अपने गले हम लगा लें;
पर सुनते हैं किसकी बातें, एक बार जो जाते हैं;
दिल चाहे ना चाहे, रुखसत लोग हो जाते हैं....
एक ना एक दिन, सबको इस दुनिया से जाना है;
हर इन्सा एक दिन जग से, हो जाता बेगाना है;
ना जाने कैसे-कैसे, हम दिल को समझाते हैं;
दिल चाहे ना चाहे, रुखसत लोग हो जाते हैं....
उठते नहीं कभी भी, गहरी नींद सो जाते हैं..... 
1 comment:
na chahte hue bhi aankh nam ho aati hai
aapki kavita rukhsat hue logon ki
yaadon ko taaza kar jaati hai
Renu
Post a Comment