Sunday, February 2, 2014

है कितना तुम्हें याद किया मैंने....

है कितना तुम्हें याद किया मैंने,
ये राहें, ये पेड़, ये फूल, ये फ़िज़ायें,
सब हैं गवाह इसके,
इनसे पूछना कभी कि,
इन्होंने कितनी ही बार देखा है,
मेरे ख्यालों में तुम्हें,
मेरा हाथ थामकर,
रखकर मेरे काँधे पर अपना सिर,
इनके सामने से गुज़रते हुए.....

पूछना इस झील के,
थमे नीले पानी से,
कितनी बार अक्श उभरा,
तुम्हारा इसमें,
और मैंने देखीं हैं इसमें,
तुम्हारी झील सी गहरी आँखें,
मेरे प्यार के काजल से,
सजते, सँवरते हुए....

इस गुलाब की पखुड़ियों पर,
अरसे से ठहरा,
एक हवा का झोका,
बताएगा तुम्हें कि,
कितनी बार रुकी हैं,
मेरी साँसें, मेरी धड़कन,
जब जब छुआ है,
मैंने इन पंखुड़ियों को,
धीरे से,
तुम्हारे गुलाबी लब समझकर,
सकुचाते हुए, डरते हुए....

है कितना तुम्हें याद किया मैंने....


1 comment:

Anjali.. said...

Heart touching lines..